हिंदी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर हुई परिचर्चा, चुनौतियों पर मंथन - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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13 सितंबर 2026

हिंदी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर हुई परिचर्चा, चुनौतियों पर मंथन

मधेपुरा: आजाद पुस्तकालय, कतराहा के बैनर तले रविवार को हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सार्क इंटरनेशनल स्कूल परिसर में मधेपुरा जिला स्थापनोत्सव के तहत ‘हिंदी पत्रकारिता: कल, आज और कल’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई. कार्यक्रम में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया से जुड़े पत्रकारों ने भाग लिया और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए. कार्यक्रम की अध्यक्षता मानविकी संकाय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार चौधरी ने की. उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है. एक समय पत्रकारिता साहित्य का अंग हुआ करती थी और सुधी साहित्यकार ही पत्रकारिता से जुड़े होते थे. वर्तमान समय में पत्रकारिता के स्वरूप और मानदंडों में व्यापक बदलाव आया है. कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुधांशु शेखर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज के लगभग सभी क्षेत्रों में नैतिक गिरावट का प्रभाव देखने को मिल रहा है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है. हालांकि पत्रकारिता में आज भी उम्मीद की किरण मौजूद है. 
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अमिताभ कुमार ने कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है. कल भी चुनौतियां थीं, आज भी हैं और भविष्य में भी रहेंगी. जरूरत इस बात की है कि पत्रकार इन चुनौतियों के बीच सही रास्ता तलाशें. उन्होंने पत्रकारिता में आत्ममूल्यांकन और आचार संहिता के पालन पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल पत्रकारिता के दौर में मीडिया की जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं. मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि पत्रकारिता कभी मिशन हुआ करती थी, लेकिन आज इसका बड़ा हिस्सा व्यवसाय का रूप ले चुका है. ऐसे में आने वाले समय में पत्रकारिता के सामने चुनौतियां और बढ़ेंगी. विशिष्ट अतिथि वरीय पत्रकार राकेश कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारिता एक गंभीर और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य है. इसे व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति अथवा किसी को प्रभावित करने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए. विषय प्रवेश करते हुए वरीय पत्रकार मनीष वत्स ने कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता का उदंडता में बदलना चिंताजनक है. आज खबरों से ज्यादा ‘व्यूज’ की होड़ पत्रकारिता के मूल चरित्र पर सवाल खड़े कर रही है. 
परिचर्चा को समाजशास्त्री डॉ. आलोक कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सारंग तनय, पत्रकार तुरबसु और प्रशांत कुमार ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने पत्रकारिता के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए वर्तमान की दशा और दिशा पर चर्चा की तथा भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित किया. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं मधेपुरा के महापुरुषों की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई. कार्यक्रम का संचालन आजाद पुस्तकालय, कतराहा के सचिव डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने किया. उन्होंने सभी अतिथियों एवं पत्रकारों के प्रति आभार व्यक्त किया. अंत में आजाद पुस्तकालय की ओर से किट, स्मारिका एवं पुस्तक भेंट कर उपस्थित पत्रकारों को सम्मानित किया गया. मौके पर कार्यक्रम के सह-संयोजक युवा पत्रकार अमित अंशु, असिस्टेंट प्रोफेसर प्रसन्ना सिंह राठौर, मनीष कुमार, सुनीत साना, सविता नंदन कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

(रिपोर्ट:- ईमेल)

पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....

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