डेस्क: सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर खबर प्रकाशित करना पत्रकार अमित यादव को महंगा पड़ गया. मामले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पत्रकार के खिलाफ की गई कार्रवाई को प्रतिशोधात्मक बताया है. मामला लखनऊ के गोसाईंगंज स्थित एक सरकारी स्कूल से जुड़ा है. पत्रकार अमित यादव ने स्कूल की जर्जर स्थिति, बदइंतजामी और बच्चों को हो रही परेशानियों को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थी. रिपोर्ट के बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी व्यवस्था की कमियों को उजागर करने पर पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई प्रथम दृष्टया प्रतिशोधात्मक प्रतीत होती है. कोर्ट ने इस स्थिति की तुलना “Killing the Messenger” यानी “संदेशवाहक को दंडित करने” की प्रवृत्ति से की. अदालत ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित सरकारी स्कूल की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट फोटो सहित प्रस्तुत करने को कहा है. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पत्रकारिता की स्वतंत्रता, मीडिया के अधिकार और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है. पत्रकार संगठनों और सोशल मीडिया पर भी कोर्ट की टिप्पणी और आदेश का स्वागत किया जा रहा है.
(रिपोर्ट:- सुनीत साना)
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