कुमुद सिंह की इंटरनेट की दुनिया में मजबूत पहचान है, फेम इंडिया द्वारा जारी सूची में हैं शामिल - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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21 फ़रवरी 2020

कुमुद सिंह की इंटरनेट की दुनिया में मजबूत पहचान है, फेम इंडिया द्वारा जारी सूची में हैं शामिल

मधेपुरा
फेम इंडिया पत्रिका द्वारा जारी किए गए देश के टॉप 25 महिलाओं की सूची में देश भर के जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने में माहिर मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्रखंड की कुमुद सिंह का नाम शामिल होने पर मधेपुरा यूथ एसोसिएशन (माया) के अध्यक्ष राहुल यादव ने बधाई दिया.
                    उन्होंने कहा कि मैथिली भाषा के पहले ई-पेपर 'ईसमाद' की संपादक कुमुद सिंह की इंटरनेट की दुनिया में मजबूत पहचान है. तेज़ तर्रार तेवर की कुमुद सिंह शकरपुर इस्टेट (वर्तमान मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्रखंड) से ताल्लुक रखती हैं, तथा वर्तमान में पटना में रहती है. जो देश के बड़े राजघराने में शामिल दरभंगा राज परिवार की एक शाखा है. फेसबुक पर उन्हें देश के बड़े-बड़े पत्रकार, नौकरशाह और राजनेता फॉलो करते हैं.
                    वे एक ओर सत्ता और समाजिक कुरीतियों पर तीखे प्रहार करती हैं, तो वहीं देश की राजनीति, दरभंगा राजघराने और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखती हैं. संबंधित विषय पर उनका रिसर्च मजबूत और तर्क अकाट्य होता है. कुमुद सिंह की पहचान एक महिला पत्रकार के रूप में है, जो अपनी तमाम जिम्मेदारियों को निभाती हुई अपनी पत्रकारिता से न सिर्फ समाज में फैली कुरीतियों और भ्रांतियों पर चोट करती रहती हैं, बल्कि नारी सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयासरत हैं.
                          उनकी पत्रकारिता न तो किसी ‘वाद’ या ‘धारा’ से प्रभावित है और न ही उनकी पत्रकारिता किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित है. यही वजह है कि राजनैतिक मुद्दों पर उनकी कलम कभी मोदी तो किसी दूसरे मुद्दे पर केजरीवाल, कांग्रेस या शिवसेना को समर्थन या विरोध करती दिख जाती है. हालांकि उनकी कलम अधिकांश समय राजनीतिक मुद्दों से हट कर मिथिला की सभ्यता-संस्कृति और संस्कार को लोगों के सामने लाने एवं उसे संरक्षित करने के लिए चलती हैं.
                             इसके साथ ही वह महिला सशक्तिकरण पर भी अपने विचार मजबूती से रखती हैं. एक ओर वह बेबाक राय के लिए जानी जाती हैं तो वहीं दुनिया भर में ई-समाद के जरिए मैथिली को सहज सुलभ बनाने में भी महती भूमिका निभा रही है. एक पत्रकार की हैसियत से कुमुद सिंह ने ‘ईसमाद’ के नाम को स्थापित पत्रों की सूची में शामिल कराने के साथ पाठकों के एक बड़े वर्ग को तैयार किया. पत्रकारिता के साथ उन्होंने प्रकाशन के क्षेत्र में भी कदम रखा और वहां भी ‘ईसमाद’ को विशिष्ट पहचान दिलायी.
                            इनके दिशा-निर्देशन में ‘ईसमाद’ ने छह किंडल किताबों के साथ दो पेपरबैक किताबों का प्रकाशन किया. इनमें से अधिकांश किताबों ने काफी प्रसिद्धि पायी. बिहार की राजधानी पटना में रहने वाली कुमुद सिंह का जन्म शंकरपुर इस्टेट में 11 जुलाई 1981 को हुआ. इनके पिता का नाम बाबू नंदेश्वर सिंह है. इन्होने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ग्रहण की, लेकिन ज्ञान की पिपासा और किसी भी बात को अपने नजरिये से देखने की इनकी प्रवृति बचपन से ही रही है.
                             शादी के बाद इनकी इस प्रवृति को जब इनके पति आशीष झा का संरक्षण मिला तो राजपरिवार में पलने-बढ़ने वाली यह महिला एक सशक्त महिला पत्रकार के रूप में उभरकर सामने आयी. एक पत्रकार के रूप में बेबाक लिखने वाली कुमुद सिंह सामान्य जीवन में मृदुभाषी और मिलनसार महिला हैं. 25 सशक्त महिलाओं के फेम इंडिया–एशिया पोस्ट द्वारा सामाजिक स्थिति, प्रभाव, छवि, उद्देश्य और प्रयास जैसे दस मानदंडों पर किए सर्वे में कुमुद सिंह प्रमुख स्थान पर है. बधाई देने वालों में माया के सचिव सन्तोष कुमार, उपाध्यक्ष सौरव यादव, कोषाध्यक्ष सुधांशु कुमार, कुणाल कृष्ण सहित अन्य लोग शामिल रहे.
(रिपोर्ट:- ईमेल) 

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