चौसा
चौसा प्रखंड के अंतर्गत फुलौत गांव में एक दिव्यांग पत्रकार के द्वारा कोरोना वाइरस के पल-पल के न्यूज़ को प्रसारण और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने को लेकर खबर काफी चर्चे में है. मो. शहंशाह कैफ दोनों पांव से दिव्यांग है लेकिन उनका चर्चा दिल्ली पंजाब और मधेपुरा जिला के विभिन्न क्षेत्रों में हैं.
शहंशाह कैफ अपने ट्राइसाइकिल और बैसाखी के सहारे पत्रकारिता करते है और उनकी विशेषता यह है कि शारिरिक रूप से लाचार होने के बाद भी कठिन से कठिन जगह पर जाकर न्यूज को कवरेज करते हैं, और उसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित करते हैं जिसमें लाईव टेलीकास्ट भी चलाई जाती है.
शहंशाह कैफ कई वर्षों से पत्रकारिता जगत में अपना काफी सहयोग दिया है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उनके सहायता को लेकर कोई उपकरण या फिर उनको मदद किसी के द्वारा आजतक नहीं दी गई है. हालांकि उनके हिम्मत और जज्बों के विषय में न्यूज़ पेपर और न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से कई बार प्रसारित की गई है.
शहंशाह कैफ बताते हैं कि हम दिव्यांग हैं ये निर्भर नही करता बल्कि हमारी सोच क्या है वह निर्भर करता है, इंसान का शरीर दिव्यांग होता है बल्कि मन नहीं, इसलिए हमारी सोच सबसे अलग करने की थी और मैं आज कर रहा हूं.
आज हमारे न्यूज़ को फेसबुक व्हाट्सएप के माध्यम से दिल्ली पंजाब हरियाणा से लेकर देश-विदेश में हमारे क्षेत्र के रह रहे लोग देखा करते हैं और वह कमेंट के माध्यम से लिख दिया करते हैं कि शहंशाह कैफ के माध्यम से मैं आज गांव के पल-पल की खबर को देख रहा हूं जिससे मुझे काफी खुशी मिलती है. कैफ ने बताया कि समाज की सेवा करना भी एक कला है जो मैं बखूबी निभा रहा हूँ.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
चौसा प्रखंड के अंतर्गत फुलौत गांव में एक दिव्यांग पत्रकार के द्वारा कोरोना वाइरस के पल-पल के न्यूज़ को प्रसारण और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने को लेकर खबर काफी चर्चे में है. मो. शहंशाह कैफ दोनों पांव से दिव्यांग है लेकिन उनका चर्चा दिल्ली पंजाब और मधेपुरा जिला के विभिन्न क्षेत्रों में हैं.
शहंशाह कैफ अपने ट्राइसाइकिल और बैसाखी के सहारे पत्रकारिता करते है और उनकी विशेषता यह है कि शारिरिक रूप से लाचार होने के बाद भी कठिन से कठिन जगह पर जाकर न्यूज को कवरेज करते हैं, और उसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित करते हैं जिसमें लाईव टेलीकास्ट भी चलाई जाती है.
शहंशाह कैफ कई वर्षों से पत्रकारिता जगत में अपना काफी सहयोग दिया है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उनके सहायता को लेकर कोई उपकरण या फिर उनको मदद किसी के द्वारा आजतक नहीं दी गई है. हालांकि उनके हिम्मत और जज्बों के विषय में न्यूज़ पेपर और न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से कई बार प्रसारित की गई है.
शहंशाह कैफ बताते हैं कि हम दिव्यांग हैं ये निर्भर नही करता बल्कि हमारी सोच क्या है वह निर्भर करता है, इंसान का शरीर दिव्यांग होता है बल्कि मन नहीं, इसलिए हमारी सोच सबसे अलग करने की थी और मैं आज कर रहा हूं.
आज हमारे न्यूज़ को फेसबुक व्हाट्सएप के माध्यम से दिल्ली पंजाब हरियाणा से लेकर देश-विदेश में हमारे क्षेत्र के रह रहे लोग देखा करते हैं और वह कमेंट के माध्यम से लिख दिया करते हैं कि शहंशाह कैफ के माध्यम से मैं आज गांव के पल-पल की खबर को देख रहा हूं जिससे मुझे काफी खुशी मिलती है. कैफ ने बताया कि समाज की सेवा करना भी एक कला है जो मैं बखूबी निभा रहा हूँ.
(रिपोर्ट:- ईमेल)









