आमजनों की समस्याओं पर बात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यहाँ 5 साल पहले जैसी स्थिति थी आज भी जस की तस है. टूटी सड़कें, शहर की तमाम गलियों में नाले का बहता गंदा पानी, बदतर शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था की दुर्दशा, स्थानीय मेडिकल कॉलेज एवं रेलवे फैक्ट्री में रोजगार की कालाबाजारी, सुरक्षा, महिलाओं का उत्थान, किसानों एवं छात्रों की दुर्दशा इन तमाम विषयों पर वक्ताओं ने अपनी बेबाक राय रखी. हर मोर्चे पर सरकारी तंत्र एवं सरकार को विफल बताया. कोरोना काल में बेरोजगार हुए युवाओं को सरकार रोजगार या राहत देने में पूरी तरह से विफल रही है. जनता इस बार हिसाब के मूड में नजर आ रही है.
अमित कुमार मोनी ने सत्ता में बदलाव को लोकतंत्र की जरूरत बताया. वर्तमान विधायक को उन्होंने हर मोर्चे पर फेल बताया. पिछले वर्ष का जनान्दोलन कहीं न कहीं सरकार को जनता की तरफ से बड़ी चुनौती थी जिसके बाद सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया.
कुणाल कृष्ण ने कहा कि किसानों के मामले में न तो केंद्र न राज्य किसी भी सरकार ने कोई भी कदम नहीं उठाया है. सब जस की तस है. उन्होंने प्रतिपक्ष से सीधा सवाल किया है कि रोजगार के लिए उनकी क्या योजना है और उसकी क्या गारंटी है. कोरोना काल में जो लोग बेरोजगार हुए हैं उनके लिए सरकार ने कोई खास कदम नहीं उठाए हैं. करोड़ों की लागत से बने जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज में स्थानीय लोगों के लिए कोई खास संभावनाएँ नहीं है और न अच्छी व्यवस्था. जनता को जागरूक होने की आवश्यकता है.
युवा नेता आशीष यादव ने जन अधिकार पार्टी की सरकार बनने की बात कही और कहा कि इस सरकार में महाजंगलराज आ गया है. हत्या, लूटपाट आम बात हो गई है. शराबबंदी का ढोल पीटते हैं लेकिन हर दिन शराब के ट्रक की जब्ती होती है.
अक्षय कुमार ने कहा कि इस बार युवाओं ने ठाना है कि परिवर्तन संसार का नियम है और ये विकास के लिए आवश्यक है. उन्होंने कहा कि अब तक की सरकारें युवाओं को संतुष्ट करने में पूरी तरह विफल है. बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त कर हम बेरोजगार हैं. रेलवे फैक्ट्री, मेडिकल कॉलेज करोड़ों की लागत से स्थापित तो कर दिए गये हैं लेकिन युवाओं के लिए न तो कोई संभावनाएँ हैं और न स्वास्थ्य व्यवस्था की कोई अच्छी व्यवस्था है.
सोनी कुमारी ने बदलाव को नितांत आवश्यक बताया और कहा कि निजी शिक्षकों की स्थिति दयनीय है. कोरोना काल में निजी शिक्षकों के लिए सरकारी तौर पर कोई कदम नहीं उठाए. उन्होंने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को जरूरी बताया लेकिन राजनीति के गिरते स्तर से वो हताश भी नजर आईं.
छात्र अमरदीप ने सत्ता में बदलाव के लिए कमर कस ली है. परिस्थितियाँ बदतर हुई है. छात्रों को अपनी हक की मांग करने पर पीटा जाता है. परीक्षाएँ होती हैं मगर रिजल्ट नहीं आता है. युवाओं के लिए कोई विकल्प नहीं रह गया है. इस बार सत्ता का पलटना निश्चित है.
शशिभूषण कुमार का कहना है कि जब किसी को सत्ता मिल जाती है तो वो उसको अपनी जागीर समझ लेते हैं इसलिए जरूरी है कि समय दर समय बदलाव हो. सड़क हो या शिक्षा व्यवस्था या अन्य सुविधाएं सभी लचर हालत में है. अब देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि यह चुनावी समीकरण क्या गुल खिलाता है. जनसंवाद देखने के लिए क्लिक करें.
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