मुरलीगंज: मुरलीगंज प्रखंड के गंगापुर स्थित कोशी नदी पर बने पुल से सटे एप्रोच सड़क में रेेनकट के कारण पुल के दोनो तरफ से बने अप्रोच सड़क में दरार हो गया है. अप्रोच के बीच बनी पुलिया भी धवस्त हो गई है. इसके कारण आवागमन लगभग ठप हो गया है. लोग जान जोखिम में डालकर ध्वस्त हो चुके पुलिया पर चलने को मजबूर हैं.
जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा या दुर्घटना हो सकती है. ग्रामीणों की मानें तो करोड़ो की लागत से बने इस पुल को सड़क से जोड़ने के लिए लाखों की लागत से बनाई गई इस पुलिया का ध्वस्त होना ठेकेदार की बड़ी लापरवाही है. ग्रामीणों ने बताया कि हमलोगों ने सड़क निर्माण के समय भी ठेकेदार पर आरोप लगया था कि सड़क और पुलिया बनाने में मानक के अनुरुप मेटेरियल नहीं दिया जा रहा है और न ही हाइट का खास ख्याल रखा जा रहा है.
जिससे बरसात के दिनों में संपर्क बाधित हो सकता है. लेकिन ठेकेदार के मुंशी ने ग्रामीणों को यह कह कर गुमराह कर दिया कि उसे पांच वर्षों तक सड़क के मेन्टेनेन्स की भी जिम्मेदारी है. इसीलिए लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. गांव से एनएच और एसएच को जोड़ने वाला यही एक मार्ग है. पुलिया के टूट जाने से ग्रामीणों का शहर से सम्पर्क लगभग खत्म हो चुका है.
नदी के बीच करोड़ों की लागत से बने इस पुल का कोई औचित्य नहीं रह गया है. यह मार्ग आसपास के करीब 10 पंचायत की बड़ी आबादी को जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने का एकमात्र शॉर्टकट रास्ता है.
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....
जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा या दुर्घटना हो सकती है. ग्रामीणों की मानें तो करोड़ो की लागत से बने इस पुल को सड़क से जोड़ने के लिए लाखों की लागत से बनाई गई इस पुलिया का ध्वस्त होना ठेकेदार की बड़ी लापरवाही है. ग्रामीणों ने बताया कि हमलोगों ने सड़क निर्माण के समय भी ठेकेदार पर आरोप लगया था कि सड़क और पुलिया बनाने में मानक के अनुरुप मेटेरियल नहीं दिया जा रहा है और न ही हाइट का खास ख्याल रखा जा रहा है.
जिससे बरसात के दिनों में संपर्क बाधित हो सकता है. लेकिन ठेकेदार के मुंशी ने ग्रामीणों को यह कह कर गुमराह कर दिया कि उसे पांच वर्षों तक सड़क के मेन्टेनेन्स की भी जिम्मेदारी है. इसीलिए लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. गांव से एनएच और एसएच को जोड़ने वाला यही एक मार्ग है. पुलिया के टूट जाने से ग्रामीणों का शहर से सम्पर्क लगभग खत्म हो चुका है.
नदी के बीच करोड़ों की लागत से बने इस पुल का कोई औचित्य नहीं रह गया है. यह मार्ग आसपास के करीब 10 पंचायत की बड़ी आबादी को जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने का एकमात्र शॉर्टकट रास्ता है.
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....










