मधेपुरा: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी आईसीटी लैब योजना अब सवालों के घेरे में है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई यह योजना आज ठप पड़ी है. मधेपुरा जिले के 103 विद्यालयों में लगाए गए 2000 से अधिक कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं, वहीं इन्हें लगाने वाली कंपनियों का करोड़ों रुपये का भुगतान अब तक लंबित है. जानकारी के अनुसार अगस्त 2023 में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक के निर्देश पर राज्यभर के उच्च एवं मध्य विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापित करने के लिए 250 से अधिक कंपनियों को टेंडर दिया गया था. मधेपुरा में 6 कंपनियों को जिम्मेदारी मिली थी. योजना के तहत प्रत्येक उच्च विद्यालय में 20 और मध्य विद्यालय में 10 कंप्यूटर लगाने थे. हर स्कूल में एक आईसीटी इंस्ट्रक्टर और सुरक्षा के लिए नाइट गार्ड की तैनाती भी अनिवार्य थी. टेंडर के अनुसार सरकार को प्रति कंप्यूटर 850 रुपये प्रतिमाह किराया, आईसीटी इंस्ट्रक्टर को करीब 16 हजार रुपये और नाइट गार्ड को 10,840 रुपये प्रतिमाह देना था. मधेपुरा के 103 स्कूलों में छह कंपनियों ने मिलकर 2000 से अधिक कंप्यूटर लगाए. अक्टूबर 2023 से संचालन शुरू हुआ और छात्रों को डिजिटल शिक्षा मिलने लगी. लेकिन अगस्त 2024 में शिक्षा विभाग ने पत्र जारी कर इस व्यवस्था को जनवरी 2025 तक बंद करने का आदेश दे दिया. यानी योजना कुल 15 माह चली, जबकि कंपनियों का आरोप है कि सरकार ने सिर्फ पांच माह का ही भुगतान किया. भुगतान नहीं मिलने पर कंपनियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कंपनियों का दावा है कि हाईकोर्ट ने विभाग को बकाया भुगतान का आदेश दिया, लेकिन अब तक राशि जारी नहीं हुई. कंपनियों का आरोप है कि सरकार न काम ले रही है और न भुगतान कर रही है. स्कूलों में लगे महंगे कंप्यूटर बिना उपयोग के खराब हो रहे हैं. करोड़ों की सरकारी संपत्ति कबाड़ बन रही है, जबकि कंपनियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
(रिपोर्ट:- सुनीत साना)
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